श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, जिसे औंढा नागनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शंकर के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है जिनका उल्लेख पवित्र हिंदू धर्मग्रंथों में मिलता है। इसे बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में आठवां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में, हिंगोली शहर से लगभग ४२ किमी दूर औंढा नागनाथ गांव में स्थित यह प्राचीन मंदिर लगभग ५,५०० वर्ष पुराना माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि धर्मराज युधिष्ठिर, पांडवों में वरिष्ठ पांडव, ने इस सुंदर मंदिर का निर्माण किया था। जब युधिष्ठिर हस्तिनापुर से १४ वर्षों के वनवास पर थे, तब उन्होंने यह मंदिर बनाया, ऐसा माना जाता है।Referance source-1)https://maharashtratourism.gov.in/temple/aundha-nagnath/, Referance source-2)https://hingoli.nic.in/en/tourist-place/aundha-nagnath/
इसके बाद, इस मंदिर का पुनर्निर्माण ई.स. १२वीं शताब्दी में यादव वंश के राजा सौन (यादव राजे) ने हेमाडपंथी शैली में किया। सदियों से यह मंदिर श्रद्धा और शिक्षा का केंद्र रहा है, जहाँ अनेक संत और भक्त दर्शन करने आते थे। यह मंदिर भक्ति आंदोलन से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि महान संत - संत नामदेव ने अपने जीवन का कुछ समय यहाँ प्रार्थना और भक्ति में व्यतीत किया, ऐसा माना जाता है।
आज भी औंढा नागनाथ मंदिर केवल एक पवित्र स्थल ही नहीं बल्कि भारत की प्राचीन वास्तुकला और संस्कृति का अद्भुत उदाहरण है, जो अपने लंबे इतिहास और आध्यात्मिक महत्व को संजोए हुए है। भक्तों का ऐसा विश्वास है कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन और पूजा करने से भय दूर होता है, नकारात्मक शक्तियों से संरक्षण मिलता है और शांति, समृद्धि, आशीर्वाद तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
औंढा नागनाथ, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सभी पूजा और विधि अधिकृत गुरुजी (मंदिर के पुजारी) करते हैं, जो पारंपरिक गुरुजी हैं। ये गुरुजी पीढ़ी दर पीढ़ी मंदिर की सेवा कर रहे हैं और विधि करते समय प्राचीन वैदिक परंपराओं का पालन करते हैं।
नीचे औंढा नागनाथ के पुजारीजी की जानकारी दी गई है: coming soon
औंढा नागनाथ नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर रोज़ सुबह ५:३० बजे से रात ९:०० बजे तक खुला रहता है, जिससे भक्त दिनभर भगवान शंकर का दर्शन और आशीर्वाद ले सकते हैं। सुबह ५:३० बजे सुबह की आरती से दिव्य विधियों की शुरुआत होती है, जिससे मंदिर में आध्यात्मिक ऊर्जा भर जाती है। दोपहर की पूजा और दर्शन दोपहर १२:०० बजे से ३:०० बजे तक होते हैं, जबकि संध्याकालीन आरती शाम ७:०० बजे से शुरू होती है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त भाग लेते हैं। विशेष अवसरों जैसे कि सोमवार, श्रावण महीना और महाशिवरात्रि पर मंदिर में भारी संख्या में यात्री आते हैं और अभिषेक विधि संपन्न होती है, जिससे दर्शन का अनुभव और अधिक शक्तिशाली और पवित्र बनता है।
“नागेश्वर” शब्द का अर्थ है साँपों के अधिपति (नाग + ईश्वर)। आख्यायिकी के अनुसार, भगवान शंकर यहाँ अपने भक्तों को राक्षस दरूकापासून बचाने के लिए प्रकट हुए थे, इसलिए इस मंदिर को 'दारुकवन ज्योतिर्लिंग' भी कहा जाता है। यहाँ का अनोखा शिवलिंग आधा रेत और आधा शालिग्राम शिला से बना है, और सभी ज्योतिर्लिंगों में इसे आध्यात्मिक दृष्टि से अद्वितीय माना जाता है।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, दरुका नाम का एक बलशाली राक्षस था। वह अपनी पत्नी दरुकी के साथ दारुकवन नामक जंगल में ऋषियों और निर्दोष लोगों को परेशान करता था। उसे देवी पार्वती से एक वरदान मिला था, जिससे उसे विशाल शक्ति प्राप्त हुई थी। इस शक्ति का दुरुपयोग करके दरुका ने चारों ओर भय फैलाना शुरू कर दिया।
ऋषियों और भक्तों ने भगवान शंकर से रक्षा के लिए प्रार्थना की। उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान शंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और दरुका राक्षस का संहार किया। चूँकि भगवान यहाँ सर्पराक्षस से रक्षक के रूप में प्रकट हुए, इसलिए उन्हें नागनाथ या नागेश्वर – अर्थात् सर्पों के अधिपति के रूप में जाना जाने लगा।
माना जाता है कि भगवान शंकर यहाँ ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा निवास करते हैं, ताकि वे अपने भक्तों की रक्षा बुरी शक्तियों से कर सकें। “नागनाथ” नाम भी “नाग” (सर्प) और “नाथ” (स्वामी) शब्दों से आया है, जिसका अर्थ है सर्पों का अधिपति।
श्रावण महीने और महाशिवरात्रि पर भक्त यहाँ रुद्राभिषेक, जलाभिषेक जैसी विशेष पूजाएँ करते हैं। पवित्र अर्पण में निम्नलिखित सामग्री शामिल होती है:
माना जाता है कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग पर अभिषेक करने से मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा मिलती है।
यदि आप भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की यात्रा जीवन में एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव है। यहाँ दैवी ऊर्जा का अनुभव करें, अभिषेक पूजा करें और “हर हर महादेव” के अखंड उद्घोष में स्वयं को मग्न करें। अधिकृत गुरुजी के साथ पूजा बुक करें, दर्शन समय देखें और मंदिर में होने वाले विधियों के बारे में अधिक जानें, वह भी सीधे nageshwartemple.com वेबसाइट के माध्यम से।
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